भारतीय अर्थव्यवस्था पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन संपन्न, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. सुनीता सिंह रहीं मुख्य अतिथि...
सबसे तेज खबर/ पांवटा साहिब
जिला सिरमौर के श्री गुरु गोबिंद सिंह जी राजकीय महाविद्यालय, पांवटा साहिब में “बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारतीय अर्थव्यवस्था: अवसर एवं चुनौतियां” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का शनिवार को समापन हुआ। समापन समारोह में हिमाचल प्रदेश की उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. सुनीता सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। सम्मेलन में शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों ने भारतीय अर्थव्यवस्था, सामाजिक-आर्थिक विकास, जनसंख्या तथा आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। मुख्य अतिथि डॉ. सुनीता सिंह ने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जगदीश चौहान तथा पूरी आयोजन समिति को बधाई दी। उन्होंने सम्मेलन के विषय को समसामयिक और महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इस तरह के अकादमिक सम्मेलनों का नियमित आयोजन होना चाहिए। ऐसे आयोजनों से शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को अपने विचार साझा करने, नए शोध निष्कर्षों से परिचित होने तथा विभिन्न विषयों पर सार्थक संवाद स्थापित करने का अवसर मिलता है।
सम्मेलन के समापन सत्र में डॉ. डी. एस. तोमर ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. उत्तमा पांडे ने दो दिवसीय सम्मेलन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए विभिन्न सत्रों, शोध पत्र प्रस्तुतियों और प्रमुख अकादमिक गतिविधियों की जानकारी दी। समापन सत्र में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के जनसंख्या अनुसंधान केंद्र के पूर्व निदेशक प्रो. एन. एस. बिष्ट ने जनसंख्या और विकास के पारस्परिक संबंधों पर अपने विचार रखे। उन्होंने जनसंख्या में होने वाले परिवर्तनों और विकास की प्रक्रिया के बीच संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि जनसंख्या से जुड़े मुद्दों को सामाजिक-आर्थिक विकास की नीतियों एवं योजनाओं के साथ समन्वित करना आवश्यक है। उनका व्याख्यान सम्मेलन की विषयवस्तु के अनुरूप विकास की चुनौतियों को समझने में महत्वपूर्ण रहा।
सम्मेलन के दूसरे दिन के प्रथम सत्र की अध्यक्षता डॉ. रामलाल शर्मा ने की, जबकि डॉ. डी. डी. शर्मा सह-अध्यक्ष रहे। इस सत्र के मुख्य वक्ता हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (HIPA) के भूगोल विभाग से डॉ. खयाल चंद ने हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने प्रदेश में भूस्खलन, बादल फटने, अचानक आने वाली बाढ़ तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न खतरों और संवेदनशीलताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए प्रभावी पूर्व चेतावनी प्रणाली, जन-जागरूकता, प्रशासनिक समन्वय और सतत विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की चुनौतियों और उनसे निपटने के लिए प्रभावी रणनीतियां अपनाने के महत्व को भी रेखांकित किया। दूसरे दिन का एक अन्य सत्र शोध पत्र प्रस्तुतियों के लिए आयोजित किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता डॉ. डी. एस. तोमर ने की, जबकि श्री टी. एस. चौहान सह-अध्यक्ष रहे। प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए तथा शोध निष्कर्षों और समकालीन मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। इस सत्र ने शोधकर्ताओं एवं शिक्षाविदों को अपने शोध कार्य साझा करने और अकादमिक संवाद को आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान किया। महाविद्यालय के प्राचार्य एवं सम्मेलन के संरक्षक डॉ. जगदीश चौहान के मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग से सम्मेलन का सफल आयोजन हुआ। दो दिवसीय सम्मेलन में भारतीय अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, विकास की संभावनाओं और समकालीन चुनौतियों पर व्यापक अकादमिक विमर्श किया गया। समापन समारोह में पूर्व प्राचार्य डॉ. प्रेम भारद्वाज तथा राजकीय महाविद्यालय कफोटा की प्राचार्या डॉ. सुलक्षना शर्मा भी उपस्थित रहीं। सम्मेलन के संयोजक डॉ. ध्यान सिंह तोमर, सह संयोजक डॉ. स्वामीनाथ, आयोजन सचिव डॉ. यशपाल सिंह तोमर, प्रो. रिंकू अग्रवाल, वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. विम्मी रानी, प्रो. मंदीप गांधी, डॉ. दीपाली भंडारी, डॉ. जसवंत सिंह सहित महाविद्यालय के सभी स्टाफ सदस्य और प्रतिभागी उपस्थित रहे। दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ने भारतीय अर्थव्यवस्था के बदलते वैश्विक परिदृश्य में उपलब्ध अवसरों, विकास संबंधी चुनौतियों, जनसंख्या के प्रभाव तथा आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श के लिए एक सार्थक अकादमिक मंच प्रदान किया।
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