सबसे तेज खबर/ शिलाई (नीलम ठाकुर)
कहते हैं हौसले के आगे मुश्किलें भी घुटने टेक देती हैं, लेकिन जब नियति ही क्रूर हो जाए, तो इंसान बेबस हो जाता है। सिरमौर जिला के शिलाई विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले मिल्हा के जुवाधार गांव से एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक 27 वर्षीय हौसले से भरी युवती प्रियंका शर्मा ने लंबी बीमारी के बाद आखिरकार दम तोड़ दिया। प्रियंका की मौत से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और हर आंख नम है। एक साधारण किसान परिवार में जन्मी प्रियंका महज 9 साल की थी, जब उसे किडनी की गंभीर बीमारी ने जकड़ लिया था। जहाँ इस उम्र में बच्चे खेलते-कूदते हैं,और बेफिक्र होकर स्कूलों की राह पकड़ते हैं,वहीं, प्रियंका अस्पतालों के चक्कर काट रही थी। वह पिछले 18 सालों से जिंदगी और मौत के बीच झूल रही थी और अंतिम समय में डायलिसिस (Dialysis) के सहारे सांसें ले रही थी।
प्रियंका के माता-पिता ने अपनी लाडली को बचाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। उसका इलाज देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे PGI चंडीगढ़, एम्स और IGMC शिमला, देहरादून में लगातार चल रहा था। 5 भाई-बहनों में सबसे बड़ी प्रियंका अपने परिवार की रीढ़ और माता-पिता की सबसे बड़ी उम्मीद थी। उसकी माता आशा देवी आंगनवाड़ी में हेल्पर के रूप में तैनात हैं और पिता सीताराम खेतीबाड़ी कर किसी तरह घर का गुजारा चलाते हैं। इस सीमित आय के बावजूद, माता-पिता ने अपनी पूरी जमा-पूंजी और ताकत प्रियंका के इलाज में झोंक दी थी। 18 साल का लंबा संघर्ष गवाह है कि प्रियंका और उसके परिवार ने आखिरी सांस तक हार नहीं मानी। लेकिन विधाता को कुछ और ही मंजूर था। प्रियंका की यह विदाई पीछे छोड़ गई है एक रोता बिलखता परिवार और कभी न भरने वाला एक गहरा शून्य।
إرسال تعليق