प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय हाटी समिति के पदाधिकारियों के साथ-साथ शिमला, शिलाई, कफोटा और राजगढ़ हाटी इकाइयों के वरिष्ठ सदस्य तथा हाल ही में निर्वाचित जिला परिषद सदस्य भी शामिल रहे।
मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को अवगत कराया कि हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने संबंधी कानून पर उच्च न्यायालय में लंबे समय से सुनवाई चल रही है तथा अंतरिम स्थगन आदेश के कारण समुदाय के लोगों को पिछले लगभग ढाई वर्षों से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। विशेष रूप से बेरोजगार युवा और विद्यार्थी इस कानून के तहत मिलने वाले लाभों और अवसरों से वंचित हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राज्यपाल से आग्रह किया कि केंद्र सरकार के माध्यम से कानूनी प्रक्रिया के तहत इस अंतरिम स्थगन आदेश को जल्द से जल्द निरस्त करवाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं, ताकि हाटी समुदाय के युवाओं को उनका अधिकार और लाभ मिल सके।
राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल की बात को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना तथा समुदाय को हो रही कठिनाइयों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा और कानूनी अड़चन को दूर करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
हाटी समिति ने उम्मीद जताई है कि राज्यपाल के हस्तक्षेप से इस मामले में सकारात्मक प्रगति होगी और लंबे समय से लंबित मांग को न्याय मिल सकेगा।

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