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माटी की बेटी ने छुआ आसमान: सरकारी स्कूल से निकलीं डॉ. रुचि शर्मा अब सिविल अस्पताल पावंटा साहिब में बतौर स्त्री रोग विशेषज्ञ के रूप देंगी सेवाएं...

माटी की बेटी ने छुआ आसमान: सरकारी स्कूल से निकलीं डॉ. रुचि शर्मा अब सिविल अस्पताल पावंटा साहिब में बतौर स्त्री रोग विशेषज्ञ देंगी सेवाएं...

सबसे तेज खबर/ नाहन

सिरमौर जिले के नाहन क्षेत्र से एक बेहद प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहाँ अभावों और कठिनाइयों को पीछे छोड़ते हुए डॉ. रुचि शर्मा ने सफलता का नया इतिहास रचा है। नाहन के एक साधारण सरकारी स्कूल में टाट-पट्टी पर बैठकर अपनी प्राथमिक शिक्षा की शुरुआत करने वाली डॉ. रुचि शर्मा (पुत्री शिवलाल शर्मा) अब सिविल अस्पताल पावंटा साहिब में बतौर स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynaecologist) अपनी सेवाएं देकर क्षेत्र की महिलाओं के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभालेंगी। उनकी यह उपलब्धि यह साबित करती है कि यदि मन में दृढ़ संकल्प हो तो साधारण पृष्ठभूमि भी सपनों की उड़ान में बाधा नहीं बन सकती।

डॉ. रुचि शर्मा की इस मुकाम तक पहुँचने की राह संघर्षों से भरी रही है। उन्होंने वर्ष 2011 में MBBS की पढ़ाई पूरी कर अपने चिकित्सीय करियर की शुरुआत की। उनकी पहली नियुक्ति कायरा में हुई, जिसके बाद उन्होंने लगभग 6 वर्षों तक ठियोग और 2 वर्षों तक सैंज क्षेत्र के दूरदराज इलाकों में अपनी सेवाएं दीं। इन ग्रामीण इलाकों में काम करते हुए उन्होंने महिलाओं की स्वास्थ्य समस्याओं और उनके दर्द को बहुत करीब से देखा। मरीजों के इसी दर्द और तकलीफ ने उन्हें महिलाओं के बेहतर इलाज के लिए खुद को समर्पित करने के लिए प्रेरित किया।

महिलाओं की स्वास्थ्य देखभाल में विशेष योगदान देने के संकल्प के साथ डॉ. रुचि ने पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) की पढ़ाई में कदम रखा। तीन वर्षों तक दिन-रात कठिन मेहनत और उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद वे स्त्री रोग विशेषज्ञ बनीं। विशेषज्ञता प्राप्त करने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग सिरमौर जिले के पावंटा साहिब में हुई है। अपने गृह जिले में वापसी पर डॉ. रुचि का कहना है कि अपनी माटी की सेवा करना और स्थानीय महिलाओं को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना उनके लिए सबसे बड़े संतोष की बात है।

इस पूरी सफलता के पीछे डॉ. रुचि शर्मा अपने परिवार के अमूल्य सहयोग और त्याग को मुख्य वजह मानती हैं। वे बताती हैं कि उनके माता-पिता के त्याग और भाई के अटूट मार्गदर्शन व साथ की बदौलत ही वे हर परिस्थिति का सामना कर सकीं। अनगिनत रातें किताबों के बीच जागकर और शारीरिक थकावट को भूलकर जो सपना उन्होंने देखा था, वह आज साकार हो गया है। डॉ. रुचि शर्मा की यह कामयाबी क्षेत्र के लाखों युवाओं और बेटियों के लिए एक मिसाल है कि सरकारी स्कूल की देहलीज़ से निकलकर भी आसमान को छुआ जा सकता है।

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